शनिवार, 31 अक्तूबर 2009

बिहारी से दिल्लीसेटवा तक


बिहार का सिवान स्टेशन खचाखच भरा हुआ था शायद वैशाली के आने का समय हो रहा था!स्टेशन पर लोग ही लोग थे! वैशाली एक्सप्रेस दिल्ली की तरफ आती है,स्टेशन पर लगा मेला भी दिल्ली आनेवालों का ही था! मेले में कुछ साफ सुथरे कपडे पहने सलीकेदार अंदाज़ में किनारे खड़े थे तो वहीँ ज्यादातर स्टेशन पर दरी बिछाये बैठे लेटे पड़े थे! हाँ जो साफ सुथरे नहीं थे उनका हुलिया बताना भी जरूरी है,ये वही लोग थे जिनको दिल्ली और आस-पास के शहरों ने एक ब्रांड से नवाज़ दिया है(बिहारी ब्रांड), हाँथ में झोरा(थैला),सर पर बोरा(सामान से भरा कट्टा),पास में रखा टीन का बक्सा!कपडे पहनने का अंदाज़-पैर में खरोच खाया हुआ चमड़े का जूता,५-७ साल पहले से इस्तेमाल हो रही जींस,ऊपर लटकता हुआ रंगीन कुरता,साथ में मेहरारू (पत्नी) और लईका (बेटा)!बड़े जोश में खड़े थे सब,गांव से दिल्ली जो जाना है!भोजपुरी में नहीं हिंदी में बतिया रहे थे!
      मैं इधर दिल्ली से जाने वाली वैशाली से उतरा सिवान स्टेशन पर,मेरे एक चचेरे चाचा हैं वो मेरा इंतजार कर रहे थे!मिटटी की खुशबू बड़ी प्यारी होती है मैं भी उस के रश में भाव-विभोर हो गया,जोश में हम भी बहार निकालने लगे,पर में चाचा भिनभिना रहे थे भीड़ से पर पाने में!एक भिनभिनाहट कुछ यूँ थी 'अरे इ सब दिल्ली सेटवा बसवा देले बाडन सा' मतलब दिल्लीसेट लोगों ने गंध मचा दिया है!मेने पुछा(भाई इ कहे कह तारा)एसा क्यों कह रहे हो ये तो यहीं अपने गाँव के लोग हैं!बड़े व्यंगातमक लहजे में जवाब मिला अरे सब जाके वहा जाके मजदूरी ही तो करते है साले दिल्लिसेट!!!!!!!में हैरत में पड़ गया क्योंकि मैं दिल्ली में स्तरहीन स्थानियों से मैले कुचले लोगों के लिए एक ही संबोधन सुना करता हूँ ,चल बिहारी कहीं का!!!तो क्या सिवान स्टेशन की वो भीड़ पाकिस्तान में गए भारतीय मुसलमानों (मोहाजिर) जैसी है???ना यहाँ के ना वहां के!!!!!!

3 टिप्‍पणियां:

  1. हां ये सच है।
    लौटना भी कठिन है, चल चुका युग एक जीवन
    अब शब्द ही घर है, घर ही जाल है, जाल ही तुम हो
    अपने में ही उलझो, अपने में ही सुलझो
    अपने में ही गुम हो। .........

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  2. ठीक कह रहे हो मनीष... राज जैसे दूसरों को देख बिहार के लोग,भी शायद करनी में उनसे भी आगे निकलने की होड़ पाले बैठे हैं.. अपने भाईयों से भी दिल्ली सेट होने की दुश्मनी निकालने की राह.... लानत है...!!!!!

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  3. एक बात और... वर्ड वैरीफिकेशन हटा लीजिय़े तो हमें टिप्पणियां भेजने में आसानी रहेगी...।
    शुभकामनाएं.....!!!

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